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mahabharat 13.14.d44-d45: श्रेष्ठ मुनियों! मैंने देवताओं के सामने ही उनकी रक्षा-व्यवस्था को तोड़ डाला, अमृत के रक्षकों को भगा दिया, इन्द्र और मरुद्गणों सहित समस्त देवताओं को युद्ध में परास्त कर दिया तथा शीघ्रता से अमृत का अपहरण कर लिया। मेरा वह पराक्रम देखकर आकाशवाणी हुई।   |   mahabharat अध्याय 13.14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा  »  श्लोक d44-d45
 
 
श्लोक  13.14.d44-d45 
मयामृतं देवतानां मिषतामृषिसत्तमा:॥
हृतं विपाट्य तं यन्त्रं विद्राव्यामृतरक्षिण:।
देवता विमुखीकृत्य सेन्द्रा: समरुतो मृधे॥
तं दृष्ट्वा मम विक्रान्तं वागुवाचाशरीरिणी।
 
 
अनुवाद
श्रेष्ठ मुनियों! मैंने देवताओं के सामने ही उनकी रक्षा-व्यवस्था को तोड़ डाला, अमृत के रक्षकों को भगा दिया, इन्द्र और मरुद्गणों सहित समस्त देवताओं को युद्ध में परास्त कर दिया तथा शीघ्रता से अमृत का अपहरण कर लिया। मेरा वह पराक्रम देखकर आकाशवाणी हुई।
 
Eminent sages! In front of the gods, I broke their defense mechanism, drove away the protectors of the nectar, defeated all the gods including Indra and the Marudganas in the battle, and quickly kidnapped the nectar. Seeing that bravery of mine, Akashvani said.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)