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श्लोक 13.14.d43  |
न स्म शक्यो मया वेत्तुं न भवद्भि: कथंचन॥
यथा मां प्राह भगवांस्तथा तच्छ्रूयतां मम। |
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| अनुवाद |
| न तो आप और न ही मैं ईश्वर के वास्तविक स्वरूप को किसी भी तरह जान सकते हैं। ईश्वर ने स्वयं अपने बारे में मुझे जो कुछ बताया है, उसे सुनिए। |
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| Neither you nor I can know the true nature of God in any way. Listen to whatever God himself has told me about himself. |
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