श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा  »  श्लोक d42
 
 
श्लोक  13.14.d42 
मया तु महदाश्चर्यं पुरा दृष्टं सनातने।
देवे श्रीवत्सनिलये तच्छृणुध्वमशेषत:॥
 
 
अनुवाद
सुनो, मैं तुम्हें वह महान् आश्चर्यजनक बात बताता हूँ, जो मैंने पूर्वकाल में श्रीवत्स चिन्ह के रक्षक सनातन भगवान श्रीहरि के विषय में देखी है।
 
Listen, I shall tell you about the great astonishing thing that I have seen in the past regarding the eternal God Sri Hari who is the protector of the Srivatsa symbol.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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