श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा  »  श्लोक d41
 
 
श्लोक  13.14.d41 
सुपर्ण उवाच
स्थूलतो यस्तु भगवांस्तेनैव स्वेन हेतुना।
त्रैलोक्यस्य तु रक्षार्थं दृश्यते रूपमास्थित:॥
 
 
अनुवाद
गरुड़जी बोले - महात्माओं! भगवान् जो साकार रूप में हैं, वे तीनों लोकों की रक्षा करने के लिए ही लोगों को साकार रूप में दिखाई देते हैं।
 
Garudji said – Mahatmas! God, who is in physical form, is visible to people in his physical form for the same reason to protect the three worlds.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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