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mahabharat 13.14.d38-d39: पृथ्वी, वायु, आकाश, जल और अग्नि - ये पाँच भूत हैं; इन भूतों के गुण क्रमशः; भावना का अभाव; सत्व, रज, तम, सात्विक, राजस और तामस भाव; मन, बुद्धि और तेज - ये वास्तव में समझने योग्य हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा  »  श्लोक d38-d39
 
 
श्लोक  13.14.d38-d39 
पृथिवी वायुराकाशमापो ज्योतिश्च पञ्चमम्।
गुणाश्चैषां यथासंख्यं भावाभावौ तथैव च॥
तम: सत्त्वं रजश्चैव भावाश्चैव तदात्मका:।
मनो बुद्धिश्च तेजश्च बुद्धिगम्यानि तत्त्वत:॥
 
 
अनुवाद
पृथ्वी, वायु, आकाश, जल और अग्नि - ये पाँच भूत हैं; इन भूतों के गुण क्रमशः; भावना का अभाव; सत्व, रज, तम, सात्विक, राजस और तामस भाव; मन, बुद्धि और तेज - ये वास्तव में समझने योग्य हैं।
 
Earth, air, sky, water and fire—these five ghosts; The qualities of these ghosts respectively; lack of emotion; Sattva, Rajas, Tama, Sattvik, Rajas and Tamas Bhavas; Mind, intelligence and brilliance – these are truly intelligible.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)