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श्लोक 13.14.d34  |
प्रकृतिर्विकृतिर्वास्य कीदृशी क्व नु संस्थिति:।
एतद् भवन्तं पृच्छामो देवोऽयं क्व कृतालय:॥ |
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| अनुवाद |
| उसका स्वरूप या विकृति क्या है? वह कहाँ है? और भगवान नारायण ने अपना निवास कहाँ बनाया है? ये सब बातें हम आपसे पूछते हैं। |
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| What is his nature or his deformity? Where is he? And where has Lord Narayana made his home? We ask you all these things. |
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