श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा  »  श्लोक d34
 
 
श्लोक  13.14.d34 
प्रकृतिर्विकृतिर्वास्य कीदृशी क्व नु संस्थिति:।
एतद् भवन्तं पृच्छामो देवोऽयं क्व कृतालय:॥
 
 
अनुवाद
उसका स्वरूप या विकृति क्या है? वह कहाँ है? और भगवान नारायण ने अपना निवास कहाँ बनाया है? ये सब बातें हम आपसे पूछते हैं।
 
What is his nature or his deformity? Where is he? And where has Lord Narayana made his home? We ask you all these things.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas