श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा  »  श्लोक d31
 
 
श्लोक  13.14.d31 
गरुड उवाच
किं मया ब्रूत वक्तव्यं कार्यं च वदतां वरा:॥
यूयं हि मां यथायुक्तं सर्वे वै देष्टुमर्हथ।
 
 
अनुवाद
गरुड़ बोले - हे वक्ताओं में श्रेष्ठ मुनियों! आप मुझसे किस विषय पर उपदेश करवाना चाहते हैं? कृपया मुझे बताइए। आप मुझे सभी उपयुक्त कार्यों के लिए आदेश दे सकते हैं।
 
Garuda said - O great sages among speakers! What topic do you want me to preach on? Please tell me. You can order me for all appropriate tasks.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd