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श्लोक 13.14.d24  |
अत्र वो वर्तयिष्यामि इतिहासं पुरातनम्।
सुपर्णस्य च संवादमृषीणां चापि देवता:॥ |
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| अनुवाद |
| हे देवताओं! इस विषय में मैं आपसे गरुड़ और ऋषियों के संवाद के रूप में प्राचीन इतिहास कह रहा हूँ। |
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| O Gods! In this matter I am telling you the ancient history in the form of the conversation between Garuda and the sages. |
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