श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा  »  श्लोक d24
 
 
श्लोक  13.14.d24 
अत्र वो वर्तयिष्यामि इतिहासं पुरातनम्।
सुपर्णस्य च संवादमृषीणां चापि देवता:॥
 
 
अनुवाद
हे देवताओं! इस विषय में मैं आपसे गरुड़ और ऋषियों के संवाद के रूप में प्राचीन इतिहास कह रहा हूँ।
 
O Gods! In this matter I am telling you the ancient history in the form of the conversation between Garuda and the sages.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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