श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा  »  श्लोक d22
 
 
श्लोक  13.14.d22 
भीष्म उवाच
एवमुक्त: सुरै: सर्वैर्वचनं वचनार्थवित्।
उवाच पद्मनाभस्य पूर्वरूपं प्रति प्रभो॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी कहते हैं - प्रभु ! जब सब देवताओं ने ऐसा कहा, तब शब्द का अर्थ समझाने वाले भगवान ब्रह्मा ने भगवान पद्मनाभ (विष्णु) के पूर्वरूप के विषय में इस प्रकार कहा -
 
Bhishmaji says – Lord! When all the gods said this, Lord Brahma, who explained the meaning of the word, said about the previous form of Lord Padmanabha (Vishnu) in this way -
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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