श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा  »  श्लोक d21
 
 
श्लोक  13.14.d21 
कोऽयमस्मान् परित्राय तूष्णीमेव यथागतम्।
प्रतिप्रयातो दिव्यात्मा तं न: शंसितुमर्हसि॥
 
 
अनुवाद
किस दिव्य पुरुष ने हमारी रक्षा की और जिस प्रकार आया था, उसी प्रकार चुपचाप लौट गया? कृपया हमें यह बताइए।
 
Which divine person protected us and returned silently as he had come? Please tell us this.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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