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श्लोक 13.14.d203  |
तदेव परमो मोक्षो मोक्षद्वारं च भारत।
यदा विनिश्चितात्मानो गच्छन्ति परमां गतिम्॥ |
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| अनुवाद |
| भरतनंदन! जब निश्चयबुद्धि वाला मनुष्य परमात्म तत्व को जानकर परमपद को प्राप्त कर लेता है, उसे परम मोक्ष या मोक्ष का द्वार कहते हैं। |
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| Bharatnandan! When a person with a determined intellect attains the supreme state by knowing the divine essence, that is called ultimate salvation or the door to salvation. |
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(दाक्षिणात्य प्रतिमें अध्याय समाप्त)
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके २०४ १/२ श्लोक मिलाकर कुल २१० १/२ श्लोक हैं, Last split of 2 chapters)
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