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mahabharat 13.14.d202: जो लोग व्यावहारिक यज्ञों को त्यागकर जप और हवन में तत्पर रहते हुए अपने हृदय में भगवान विष्णु का ध्यान करते हैं, वे परम मोक्ष को प्राप्त करते हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.14.d202 
आरम्भयज्ञानुत्सृज्य जपहोमपरायणा:।
ध्यायन्तो मनसा विष्णुं गच्छन्ति परमां गतिम्॥
 
 
अनुवाद
जो लोग व्यावहारिक यज्ञों को त्यागकर जप और हवन में तत्पर रहते हुए अपने हृदय में भगवान विष्णु का ध्यान करते हैं, वे परम मोक्ष को प्राप्त करते हैं।
 
Those who, abandoning practical sacrifices and being devoted to chanting and offering of fire, meditate on Lord Vishnu in their hearts, attain the ultimate salvation.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)