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श्लोक 13.14.d200  |
ममाप्येषा कथा तात कथिता मातुरन्तिके॥
वसुभि: सत्त्वसम्पन्नै: तवाप्येषा मयोच्यते। |
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| अनुवाद |
| पिताजी! बुद्धिमान वसुओं ने यह कथा मेरी माता गंगाजी के समक्ष मुझसे कही थी और अब मैंने इसे आपसे कहा है। |
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| Father! The wise Vasus had narrated this story to me in the presence of my mother Gangaji and now I have narrated it to you. |
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