श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा  »  श्लोक d20
 
 
श्लोक  13.14.d20 
देवा ऊचु:
भगवन् सर्वलोकेश सर्वलोकपितामह।
इदमत्यद्भुतं वृत्तं त्वं न: शंसितुमर्हसि॥
 
 
अनुवाद
देवताओं ने पूछा - सर्वलोकेश्वर! समस्त जगत के पिता! प्रभु! कृपया हमें यह अद्भुत कथा सुनाएँ।
 
The gods asked – Sarvlokeshwar! Father of the entire world! Lord! Please tell us this very amazing story.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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