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mahabharat 13.14.d2: उस युद्ध में अत्यंत भयंकर दैत्यों और बड़े-बड़े दानवों द्वारा आक्रमण किये जाने पर देवताओं को कोई रक्षक नहीं मिला।   |   mahabharat अध्याय 13.14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा  »  श्लोक d2
 
 
श्लोक  13.14.d2 
तत्र देवास्तु दैतेयैर्वध्यन्ते भृशदारुणै:।
त्रातारं नाधिगच्छन्ति वध्यमाना महासुरै:॥
 
 
अनुवाद
उस युद्ध में अत्यंत भयंकर दैत्यों और बड़े-बड़े दानवों द्वारा आक्रमण किये जाने पर देवताओं को कोई रक्षक नहीं मिला।
 
In that war, after being attacked by extremely fierce demons and big devils, the Gods could not find any protector.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)