श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा  »  श्लोक d198
 
 
श्लोक  13.14.d198 
भीष्म उवाच
ततस्ते मुनय: सर्वे सम्पूज्य विनतासुतम्।
स्वानेव चाश्रमान् जग्मुर्बभूवु: शान्तितत्परा:॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी कहते हैं - राजन! तत्पश्चात महर्षि विनतानन्दन गरुड़ की सम्पूर्ण पूजा करके अपने-अपने आश्रमों को चले गये और वहाँ शम-दम के अभ्यास में लग गये।
 
Bhishmaji says – King! Thereafter, after worshiping the entire Maharishi Vintanandan Garuda, they went to their respective ashrams and there got busy in the practice of Sham-Dum.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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