श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा  »  श्लोक d197
 
 
श्लोक  13.14.d197 
वेदान् पारयते विप्रो राजा विजयवान् भवेत्॥
वैश्यस्तु धनधान्याढ्य: शूद्र: सुखमवाप्नुयात्।
 
 
अनुवाद
जो ब्राह्मण इसका पाठ करेगा, वह वेदों का पारंगत विद्वान होगा। इसका पाठ करने से क्षत्रिय युद्ध में विजय प्राप्त करेंगे। वैश्य धन-धान्य से संपन्न होंगे और शूद्र सुखी होंगे।
 
The Brahmin who recites it will be an expert scholar of the Vedas. By reciting this, Kshatriyas will attain victory in war. Vaishya will be rich in wealth and Shudra will be happy.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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