श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा  »  श्लोक d195
 
 
श्लोक  13.14.d195 
श्राद्धकाले च विप्राणां य इमां श्रावयेच्छुचि:॥
न तत्र रक्षसां भागो नासुराणां च विद्यते।
 
 
अनुवाद
जो कोई भी व्यक्ति श्राद्ध के समय शुद्ध भाव से ब्राह्मणों को यह प्रसंग सुनाएगा, उस श्राद्ध में राक्षसों और पिशाचों को भाग नहीं मिलेगा।
 
Whoever narrates this episode to the Brahmins with pure intentions at the time of Shraddha, the demons and devils will not get a share in that Shraddha.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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