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mahabharat 13.14.d194: जो विद्वान प्रत्येक त्यौहार के अवसर पर इस कथा का वर्णन करता है, वह देवताओं द्वारा स्तुति किये गये पवित्र लोकों को प्राप्त करता है।   |   mahabharat अध्याय 13.14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा  »  श्लोक d194
 
 
श्लोक  13.14.d194 
य इमां श्रावयेद् विद्वान् कथां पर्वसु पर्वसु॥
स लोकान् प्राप्नुयात् पुण्यान् देवर्षिभिरभिष्टुतान्।
 
 
अनुवाद
जो विद्वान प्रत्येक त्यौहार के अवसर पर इस कथा का वर्णन करता है, वह देवताओं द्वारा स्तुति किये गये पवित्र लोकों को प्राप्त करता है।
 
The scholar who narrates this story on the occasion of every festival will attain the sacred worlds praised by the gods.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)