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mahabharat 13.14.d192: ऋषियों ने कहा - हे प्रभु! आपने बड़ी अद्भुत और महत्वपूर्ण कथा कही है। यह परम पवित्र प्रसंग अत्यंत शुभ है, यश, आयु और स्वर्ग देने वाला है।   |   mahabharat अध्याय 13.14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा  »  श्लोक d192
 
 
श्लोक  13.14.d192 
ऋषय ऊचु:
अहो श्रावितमाख्यानं भवतात्यद्भुतं महत्॥
पुण्यं यशस्यमायुष्यं स्वर्ग्यं स्वस्त्ययनं महत्।
 
 
अनुवाद
ऋषियों ने कहा - हे प्रभु! आपने बड़ी अद्भुत और महत्वपूर्ण कथा कही है। यह परम पवित्र प्रसंग अत्यंत शुभ है, यश, आयु और स्वर्ग देने वाला है।
 
The sages said - Oh! You have narrated a very wonderful and important story. This most sacred episode is very auspicious and gives fame, longevity and heaven.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)