श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा  »  श्लोक d191
 
 
श्लोक  13.14.d191 
एतद् व: सर्वमाख्यातं चेष्टितं तस्य धीमत:॥
मयानुभूतं प्रत्यक्षं दृष्ट्वा चाद्भुतकर्मण:।
 
 
अनुवाद
मैंने अद्भुत एवं परम बुद्धिमान भगवान श्रीहरि के समस्त दिव्य कर्मों का वर्णन आपसे किया है, जिन्हें मैंने प्रत्यक्ष देखा और अनुभव किया है।
 
I have narrated to you all the divine acts of the wonderful and most intelligent Lord Shri Hari, which I have seen and experienced directly.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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