श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा  »  श्लोक d19
 
 
श्लोक  13.14.d19 
तं दृष्ट्वान्तर्हितं देवं विष्णुं देवामितद्युतिम्।
विस्मयोत्फुल्लनयना ब्रह्माणमिदमब्रुवन्॥
 
 
अनुवाद
अनन्त तेजोमय भगवान विष्णु को अन्तर्धान होते देख देवतागण आश्चर्यचकित नेत्रों से ब्रह्माजी से इस प्रकार बोले -
 
Seeing the infinitely illustrious Lord Vishnu disappear, the gods with astonished eyes spoke to Brahmaji in this manner -
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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