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श्लोक 13.14.d189  |
सुपर्ण उवाच
एवमुक्त्वा स भगवांस्तत्रैवान्तरधीयत॥
पश्यतो मे महायोगी जगामात्मगतिर्गतिम्। |
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| अनुवाद |
| गरुड़ कहते हैं - हे ऋषियों! ऐसा कहकर भगवान वहाँ से अन्तर्धान हो गए। वे महान योगी और आत्म-साक्षात्कार के साक्षात् स्वरूप परमेश्वर मेरे देखते-देखते अन्तर्धान हो गए। |
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| Garuda says - O sages! Saying this, the Lord disappeared from there. That great Yogi and the Supreme Being who is the embodiment of self-realization disappeared before my very eyes. |
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