Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.14.d189: गरुड़ कहते हैं - हे ऋषियों! ऐसा कहकर भगवान वहाँ से अन्तर्धान हो गए। वे महान योगी और आत्म-साक्षात्कार के साक्षात् स्वरूप परमेश्वर मेरे देखते-देखते अन्तर्धान हो गए। | mahabharat अध्याय 13.14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सुपर्ण उवाच
एवमुक्त्वा स भगवांस्तत्रैवान्तरधीयत॥
पश्यतो मे महायोगी जगामात्मगतिर्गतिम्।
अनुवाद
गरुड़ कहते हैं - हे ऋषियों! ऐसा कहकर भगवान वहाँ से अन्तर्धान हो गए। वे महान योगी और आत्म-साक्षात्कार के साक्षात् स्वरूप परमेश्वर मेरे देखते-देखते अन्तर्धान हो गए।
Garuda says - O sages! Saying this, the Lord disappeared from there. That great Yogi and the Supreme Being who is the embodiment of self-realization disappeared before my very eyes.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥