श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा  »  श्लोक d188
 
 
श्लोक  13.14.d188 
एतत् ते सर्वमाख्यातं रहस्यं दिव्यमानुषम्॥
एतच्छ्रेय: परं चैतत् पन्थानं विद्धि मोक्षिणाम्।
 
 
अनुवाद
यह सब तुम्हें बताया गया है। यह देवताओं और मनुष्यों के लिए भी रहस्य है। यही परम कल्याण है। मोक्ष चाहने वाले मनुष्यों के लिए इसे ही मार्ग समझो।
 
All this has been told to you. This is a mystery even for gods and men. This is the ultimate welfare. Consider this the path for men who desire salvation.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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