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mahabharat 13.14.d183-d184: उस समय तुमने मुझ सनातन पुरुष को उस रूप में देखा था। तुम समयानुसार मेरे उस रूप को भी जान सकते हो जो उससे भी अधिक उत्तम है। तुम समयानुसार मेरे परम गुप्त, नित्य, स्थायी और अविनाशी पद को भी जान सकते हो। इस प्रकार मैं, नारायणदेव तथा हरि नाम से प्रसिद्ध परमेश्वर परम गुप्त माने गए हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा  »  श्लोक d183-d184
 
 
श्लोक  13.14.d183-d184 
स तदाहं तथारूपस्त्वया दृष्ट: सनातन:।
ततस्त्वहं परतर: शक्य: कालेन वेदितुम्॥
मम यत् परमं गुह्यं शाश्वतं ध्रुवमव्ययम्।
तदेवं परमो गुह्यो देवो नारायणो हरि:॥
 
 
अनुवाद
उस समय तुमने मुझ सनातन पुरुष को उस रूप में देखा था। तुम समयानुसार मेरे उस रूप को भी जान सकते हो जो उससे भी अधिक उत्तम है। तुम समयानुसार मेरे परम गुप्त, नित्य, स्थायी और अविनाशी पद को भी जान सकते हो। इस प्रकार मैं, नारायणदेव तथा हरि नाम से प्रसिद्ध परमेश्वर परम गुप्त माने गए हैं।
 
At that time you saw me, the eternal man, in that form. You can know my form which is even better than that, as per the time. You can also know my most secret, eternal, permanent and indestructible position, as per the time. In this way, I, Narayandev and the Supreme God, famous by the name of Hari, have been considered to be the most secret.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)