Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.14.d180: मैं ब्राह्मणों का तेज हूँ और ब्राह्मण मेरे तेज हैं। मेरे तेज से जो शरीर प्रकट हुआ है, उसे अग्नि ही समझो।   |   mahabharat अध्याय 13.14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा  »  श्लोक d180
 
 
श्लोक  13.14.d180 
अहं तेजो द्विजातीनां मम तेजो द्विजातय:।
मम यस्तेजसा देह: सोऽग्निरित्यवगम्यताम्॥
 
 
अनुवाद
मैं ब्राह्मणों का तेज हूँ और ब्राह्मण मेरे तेज हैं। मेरे तेज से जो शरीर प्रकट हुआ है, उसे अग्नि ही समझो।
 
I am the brilliance of the brahmins and the brahmins are my brilliance. The body which has appeared from my brilliance, consider it to be fire.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)