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mahabharat 13.14.d179: मेरी पूजा करके भक्त स्वर्ग और महान पद को प्राप्त करते हैं, उसी प्रकार जो पुरुष मुझे अनन्य हृदय से जानते हैं, वे मुझ परमात्मा को प्राप्त होते हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा  »  श्लोक d179
 
 
श्लोक  13.14.d179 
मामिष्ट्वा स्वर्गमायान्ति तथा चाप्नुवते महत् ।
ज्ञात्वा मामेव चैवं ते नि:सङ्गेनान्तरात्मना॥
 
 
अनुवाद
मेरी पूजा करके भक्त स्वर्ग और महान पद को प्राप्त करते हैं, उसी प्रकार जो पुरुष मुझे अनन्य हृदय से जानते हैं, वे मुझ परमात्मा को प्राप्त होते हैं।
 
By worshipping me, the worshippers attain heaven and great status. Similarly, those who know me with an unattached heart, attain me, the Supreme Soul.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)