श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा  »  श्लोक d176
 
 
श्लोक  13.14.d176 
दृष्टो वै भवता तस्मात् सरस्यमितविक्रम॥
 
 
अनुवाद
हे महाबली गरुड़! इसीलिए तो आपने मुझे उस सरोवर में देखा है।
 
O mighty Garuda! That is why you have seen me in that lake.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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