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mahabharat 13.14.d175: हे भोले! यह मेरा स्थूल रूप, जो तुमने देखा है, मेरे सूक्ष्म रूप में प्रवेश का द्वार है। मैं ही समस्त कर्मों का कारण हूँ।   |   mahabharat अध्याय 13.14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा  »  श्लोक d175
 
 
श्लोक  13.14.d175 
स्थूलदर्शनमेतन्मे यद् दृष्टं भवतानघ॥
एतत् सूक्ष्मस्य च द्वारं कार्याणां कारणं त्वहम्।
 
 
अनुवाद
हे भोले! यह मेरा स्थूल रूप, जो तुमने देखा है, मेरे सूक्ष्म रूप में प्रवेश का द्वार है। मैं ही समस्त कर्मों का कारण हूँ।
 
O innocent one! This gross form of mine which you have seen is the door to enter my subtle form. I am the cause of all actions.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)