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mahabharat 13.14.d173: वहां हवा नहीं चलती, ग्रह-नक्षत्र भी वहां नहीं पहुंच सकते, यहां तक ​​कि जल, पृथ्वी, आकाश और मन भी वहां नहीं जा सकते।   |   mahabharat अध्याय 13.14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा  »  श्लोक d173
 
 
श्लोक  13.14.d173 
न वायु: पवते तत्र न तस्मिन् ज्योतिषां गति:॥
न चाप: पृथिवी नैव नाकाशं न मनोगति:।
 
 
अनुवाद
वहां हवा नहीं चलती, ग्रह-नक्षत्र भी वहां नहीं पहुंच सकते, यहां तक ​​कि जल, पृथ्वी, आकाश और मन भी वहां नहीं जा सकते।
 
The air does not blow there, the planets and stars cannot reach there and even the water, earth, sky and the mind cannot move there.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)