vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 13: अनुशासन पर्व
»
अध्याय 14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा
»
श्लोक d173
श्लोक
13.14.d173
न वायु: पवते तत्र न तस्मिन् ज्योतिषां गति:॥
न चाप: पृथिवी नैव नाकाशं न मनोगति:।
अनुवाद
वहां हवा नहीं चलती, ग्रह-नक्षत्र भी वहां नहीं पहुंच सकते, यहां तक कि जल, पृथ्वी, आकाश और मन भी वहां नहीं जा सकते।
The air does not blow there, the planets and stars cannot reach there and even the water, earth, sky and the mind cannot move there.
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas