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यद् गुह्यं परमं बुद्धेरलिङ्गग्रहणं च यत्॥
तत् सूक्ष्मं गृह्यते विप्रैर्यतिभिस्तत्त्वदर्शभि:।
अनुवाद
यति ब्राह्मण, जो सूक्ष्म परब्रह्म के तत्वदर्शी हैं, जो बुद्धि के लिए परम रहस्य हैं, जो किसी भी रूप से स्वीकार नहीं किए जाते या जिनका अनुभव नहीं किया जा सकता, उन्हें इसका ज्ञान होता है।
Yati Brahmins, who are the Tatvdarshi of the subtle Supreme Brahman, who is the ultimate secret for the intellect, who is not accepted by any form or cannot be experienced, realizes that.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥