Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.14.d170: अतः वह ज्ञानी पुरुष ही, जिसका मन शुद्ध ज्ञान के कारण प्रसन्न (शुद्ध) है, जो आत्मा के तत्त्व को जानता है और शुद्ध है, उस ब्रह्म को प्राप्त होता है, जहाँ किसी को दुःखपूर्वक नहीं जाना पड़ता। | mahabharat अध्याय 13.14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तस्माज्ज्ञानेन शुद्धेन प्रसन्नात्मात्मविच्छुचि:॥
आसादयति तद् ब्रह्म यत्र गत्वा न शोचति।
अनुवाद
अतः वह ज्ञानी पुरुष ही, जिसका मन शुद्ध ज्ञान के कारण प्रसन्न (शुद्ध) है, जो आत्मा के तत्त्व को जानता है और शुद्ध है, उस ब्रह्म को प्राप्त होता है, जहाँ किसी को दुःखपूर्वक नहीं जाना पड़ता।
Therefore, only that wise man, whose mind is happy (pure) due to pure knowledge, who knows the essence of the soul and is pure, attains that Brahma, where no one has to go in sorrow.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥