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श्लोक 13.14.d168  |
ये त्वग्निहोत्रनियता जपयज्ञपरायणा:॥
ये मामुपासते शश्वदेतांस्त्वं दृष्टवानसि। |
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| अनुवाद |
| जो अग्निहोत्र और जप-यज्ञ में तत्पर रहते हैं, जो निरन्तर मेरी पूजा करते हैं, उनको तुमने प्रत्यक्ष देखा है। |
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| You have seen directly those who are devoted to Agnihotra and Japa-Yagya, who worship me constantly. |
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