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श्लोक 13.14.d160  |
मया सर्वमिदं व्याप्तं मयि सर्वं प्रतिष्ठितम्॥
अहं सर्वजगद्बीजं सर्वत्रगतिरव्यय:। |
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| अनुवाद |
| मैं इस सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में व्याप्त हूँ। सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड मुझमें स्थित है। मैं सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड का बीज हूँ। मेरी सर्वत्र गति है और मैं अविनाशी हूँ। |
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| I have pervaded this entire universe. The entire universe is established in me. I am the seed of the entire universe. I have movement everywhere and I am indestructible. |
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