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mahabharat 13.14.d150: आकाश में कमल और लिली के फूलों से भरी खूबसूरत झील के पास जलाई गई आग, जो आपने देखी थी, बिना किसी ईंधन के जलती है।   |   mahabharat अध्याय 13.14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.14.d150 
यत् तद् वियति दृष्टं तत् सर: पद्मोत्पलायुतम्।
तत्राग्नय: संनिहिता दीप्यन्ते स्म निरिन्धना:॥
 
 
अनुवाद
आकाश में कमल और लिली के फूलों से भरी खूबसूरत झील के पास जलाई गई आग, जो आपने देखी थी, बिना किसी ईंधन के जलती है।
 
The fires lit near the beautiful lake filled with lotuses and lilies of the valley that you saw in the sky, burn without any fuel.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)