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mahabharat 13.14.d142: काश्यप! जो मुझे जानता है, उसके लिए मैं ऐसा ही हूँ। विहंगम! मैं सबके मन और बुद्धि में निवास करता हूँ और सबका कल्याण करता हूँ।   |   mahabharat अध्याय 13.14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.14.d142 
यो मां यथा वेदयति तस्य तस्यास्मि काश्यप।
मनोबुद्धिगत: श्रेयो विदधामि विहङ्गम॥
 
 
अनुवाद
काश्यप! जो मुझे जानता है, उसके लिए मैं ऐसा ही हूँ। विहंगम! मैं सबके मन और बुद्धि में निवास करता हूँ और सबका कल्याण करता हूँ।
 
Kashyap! I am like that to the person who knows me. Vihangam! I reside in the mind and intellect of all and do good to all.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)