श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा  »  श्लोक d141
 
 
श्लोक  13.14.d141 
मत्तो जातानि भूतानि मया धार्यन्त्यहर्निशम्।
मय्येव विलयं यान्ति प्रलये पन्नगाशन॥
 
 
अनुवाद
गरुड़! समस्त जीव मुझसे ही उत्पन्न हुए हैं, मेरे ही कारण वे दिन-रात जीवित रहते हैं और प्रलय के समय वे सभी मुझमें ही लीन हो जाते हैं।
 
Garuda! All living beings have originated from me, it is because of me that they sustain life day and night and at the time of destruction all of them merge into me.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd