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mahabharat 13.14.d14: तभी आकाशवाणी हुई, जो मेघ के समान गम्भीर स्वर में बोली - 'देवताओं! युद्ध में मेरे साथ रहकर तुम दैत्यों को अवश्य परास्त करोगे।'   |   mahabharat अध्याय 13.14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा  »  श्लोक d14
 
 
श्लोक  13.14.d14 
ततोऽन्तरिक्षे वागासीन्मेघगम्भीरनि:स्वना।
जेष्यध्वं दानवान् यूयं मयैव सह सङ्गरे॥
 
 
अनुवाद
तभी आकाशवाणी हुई, जो मेघ के समान गम्भीर स्वर में बोली - 'देवताओं! युद्ध में मेरे साथ रहकर तुम दैत्यों को अवश्य परास्त करोगे।'
 
Then a voice from the sky said in a deep voice like that of a cloud - 'Gods! You will definitely defeat the demons by staying with me in the war.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)