Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.14.d139: मैं शाश्वत ईश्वर, चिंतनशील सर्वोच्च सत्ता हूँ, जिसे बुद्धिमान पुरुष देखते हैं, जो सूक्ष्म अर्थों को देखते हैं, समझते हैं और सूक्ष्म भावनाओं को जानते हैं। | mahabharat अध्याय 13.14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यत् तु मे परमं गुह्यं रूपं सूक्ष्मार्थदर्शिभि:।
गृह्यते सूक्ष्मभावज्ञै: स विभाव्योऽस्मि शाश्वत:॥
अनुवाद
मैं शाश्वत ईश्वर, चिंतनशील सर्वोच्च सत्ता हूँ, जिसे बुद्धिमान पुरुष देखते हैं, जो सूक्ष्म अर्थों को देखते हैं, समझते हैं और सूक्ष्म भावनाओं को जानते हैं।
I am the eternal God, the contemplative Supreme Being, who is perceived by wise men who see and understand the subtle meanings and know the subtle emotions.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥