श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा  »  श्लोक d132
 
 
श्लोक  13.14.d132 
एतन्मे भगवन् कृष्ण ब्रूहि सर्वमशेषत:।
गृणन्त्यग्निसमीपेषु के च ते ब्रह्मराशय:॥
 
 
अनुवाद
हे भगवान् कृष्ण! कृपया मुझे विस्तारपूर्वक सब कुछ बताइए। वे श्रेष्ठ ब्राह्मण कौन थे जो अग्नि के पास वेदों का पाठ कर रहे थे?
 
Lord Krishna! Please tell me all this in detail. Who were those great Brahmins who were reciting the Vedas near the fire?'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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