श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा  »  श्लोक d131
 
 
श्लोक  13.14.d131 
कानि तान्यग्निहोत्राणि केषां शब्द: श्रुतो मया।
शृण्वतां ब्रह्म सततमदृश्यानां महात्मनाम्॥
 
 
अनुवाद
वे अग्निहोत्र करने वाले कौन थे? वे अदृश्य महात्मा कौन थे जो निरंतर वेदों का श्रवण और पाठ कर रहे थे और जिनके वचन मैंने केवल सुने थे?
 
Who were those Agnihotra performers? Who were those invisible Mahatmas who were constantly listening to and reciting the Vedas and whose words I had only heard?
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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