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mahabharat 13.14.d129: आपका स्वरूप जानना कठिन है। यहाँ तक कि आप अजन्मा परमेश्वर का स्वरूप भी समझना कठिन है। हे भूत, वर्तमान और भविष्य के स्वामी, हे नारायण! आप पूर्णतः गहन (अज्ञेय) हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.14.d129 
स्वभावस्तव दुर्ज्ञेय: प्रादुर्भावोऽभवस्य च।
भवद्भूतभविष्येश सर्वथा गहनो भवान्॥
 
 
अनुवाद
आपका स्वरूप जानना कठिन है। यहाँ तक कि आप अजन्मा परमेश्वर का स्वरूप भी समझना कठिन है। हे भूत, वर्तमान और भविष्य के स्वामी, हे नारायण! आप पूर्णतः गहन (अज्ञेय) हैं।
 
‘Your nature is difficult to know. Even the manifestation of you, the unborn Supreme Lord, is difficult to understand. O Lord of the past, present and future, O Narayana! You are completely profound (incomprehensible).
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)