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mahabharat 13.14.d123: हे भोले मुनियों! उस अद्भुत दृश्य को देखकर मैं आश्चर्यचकित हो गया और शुद्ध एवं एकाग्र हृदय से मैंने सिर झुकाकर उस प्रभु की शरण ली।   |   mahabharat अध्याय 13.14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा  »  श्लोक d123
 
 
श्लोक  13.14.d123 
तदद्भुतमहं दृष्ट्वा विस्मितोऽस्मि तदानघा:।
जगाम शिरसा देवं प्रयतेनान्तरात्मना॥
 
 
अनुवाद
हे भोले मुनियों! उस अद्भुत दृश्य को देखकर मैं आश्चर्यचकित हो गया और शुद्ध एवं एकाग्र हृदय से मैंने सिर झुकाकर उस प्रभु की शरण ली।
 
O innocent sages! I was astonished to see that wonderful sight and with a pure and concentrated heart, I bowed my head and took refuge in that Lord.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)