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mahabharat 13.14.d118: गरुड़जी कहते हैं - मुनियो! तत्पश्चात् उसी समय परम तेजस्वी और तेजस्वी नारायण मेरे निकट ही अचानक प्रकट हो गये।   |   mahabharat अध्याय 13.14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा  »  श्लोक d118
 
 
श्लोक  13.14.d118 
सुपर्ण उवाच
ततस्तस्मिन् क्षणेनैव सहसैव महाद्युति:॥
प्रत्यदृश्यत तेजस्वी पुरस्तात् स ममान्तिके।
 
 
अनुवाद
गरुड़जी कहते हैं - मुनियो! तत्पश्चात् उसी समय परम तेजस्वी और तेजस्वी नारायण मेरे निकट ही अचानक प्रकट हो गये।
 
Garudji says-Muniyo! Subsequently, at that very moment, the most radiant and brilliant Narayana suddenly appeared very close to me.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)