श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा  »  श्लोक d117
 
 
श्लोक  13.14.d117 
श्रीभगवानुवाच
मा भैर्गरुत्मन् दान्तोऽसि पुन: सेन्द्रान् दिवौकस:॥
स्वं चैव भवनं गत्वा द्रक्ष्यसे पुत्रबान्धवान्।
 
 
अनुवाद
श्री भगवान बोले- गरुड़! डरो मत। तुमने मन और इंद्रियों पर विजय प्राप्त कर ली है। अब तुम इंद्र आदि देवताओं के साथ अपने घर जाकर अपने पुत्रों और भाइयों से मिलोगे।
 
Shri Bhagwan said- Garuda! Do not be afraid. You have conquered the mind and the senses. Now you will go back to your home along with Indra and other gods and see your sons and brothers.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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