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mahabharat 13.14.d115: हे देवराज! मेरी रक्षा कीजिए। सनातन देव! आप अनिर्वचनीय, अजन्मा, ब्राह्मणों के रक्षक हैं; इस संकट में मैं आपकी शरण में हूँ।   |   mahabharat अध्याय 13.14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.14.d115 
पाहि मां देवदेवेश कोऽप्यजोऽसि सनातन।
एवं गतोऽसि शरणं शरण्यं ब्रह्मयोनिनाम्॥
 
 
अनुवाद
हे देवराज! मेरी रक्षा कीजिए। सनातन देव! आप अनिर्वचनीय, अजन्मा, ब्राह्मणों के रक्षक हैं; इस संकट में मैं आपकी शरण में हूँ।
 
‘O Lord of gods! Please protect me. Eternal God! You are an indescribable, unborn person, the protector of Brahmins; I seek refuge in you in this crisis.’
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)