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श्लोक  13.14.d112 
मुनये ज्वरमुक्ताय ज्वराधिपतये नम:॥
अनेत्राय त्रिनेत्राय पिङ्गलाय विडूर्मिणे।
 
 
अनुवाद
जो ध्यानस्थ ऋषि हैं, ज्वर आदि रोगों से रहित हैं, ज्वर के स्वामी हैं, जिनके नेत्र नहीं हैं अथवा जिनके तीन नेत्र हैं, जो गुलाबी रंग के हैं तथा जो प्रजारूपी तरंगें उत्पन्न करने में समुद्र के समान हैं, उन भगवान विष्णु को नमस्कार है।
 
Salutations to Lord Vishnu who is a meditative sage, free from diseases like fever and the lord of fever, who has no eyes or who has three eyes, who is pinkish in color and is like an ocean in generating waves in the form of people.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)