Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.14.d110: मैं भगवान विष्णु को नमस्कार करता हूँ, जो विश्वरूप हैं, सुन्दर ब्रह्माण्ड के रचयिता हैं, विश्वरूप के स्वामी हैं, सुन्दर केशों से युक्त हैं, किरणों के समान बाल वाले हैं और अत्यन्त शक्तिशाली हैं। | mahabharat अध्याय 13.14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
विश्वाय च सुविश्वाय विश्वरूपधराय च।
केशवाय सुकेशाय रश्मिकेशाय भूरिणे॥
अनुवाद
मैं भगवान विष्णु को नमस्कार करता हूँ, जो विश्वरूप हैं, सुन्दर ब्रह्माण्ड के रचयिता हैं, विश्वरूप के स्वामी हैं, सुन्दर केशों से युक्त हैं, किरणों के समान बाल वाले हैं और अत्यन्त शक्तिशाली हैं।
I offer my obeisances unto Lord Vishnu, who is the cosmic form, the creator of the beautiful universe, the possessor of the cosmic form, who is endowed with beautiful hair, has hair in the form of rays and is very powerful.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥