श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 14: ब्रह्माजीका देवताओंसे गरुड-कश्यप-संवादका प्रसंग सुनाना, गरुडजीका ऋषियोंके समाजमें नारायणकी महिमाके सम्बन्धमें अपना अनुभव सुनाना तथा इस प्रसंगके पाठ और श्रवणकी महिमा  »  श्लोक d11
 
 
श्लोक  13.14.d11 
वेदा: साङ्गोपनिषद: सरहस्या: ससंग्रहा:।
सोङ्कारा: सवषट्कारा: प्राहुस्त्वां यज्ञमुत्तमम्॥
 
 
अनुवाद
वेद अपने समस्त अंगों सहित तथा उपनिषद, उनके रहस्य, संग्रह, ओंकार और वषट्कार तुम्हें उत्तम यज्ञ का स्वरूप बताते हैं।
 
The Vedas with all their parts and Upanishads, their secrets, collections, Omkar and Vashatkar tell you the form of the best yajna.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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