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mahabharat 13.138.7: इसीलिए मेरी गौओं के समूह में रहने वाला बैल मेरे रथ की ध्वजा में मेरे ऊपर विराजमान रहता है। मैं सदैव गौओं के साथ रहकर प्रसन्न रहता हूँ। इसलिए उन गौओं की सदैव पूजा करनी चाहिए। 7.   |   mahabharat अध्याय 13.138: महादेवजीका धर्मसम्बन्धी रहस्य   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 138: महादेवजीका धर्मसम्बन्धी रहस्य  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  13.138.7 
तस्माद् व्रजस्थानगतस्तिष्ठत्युपरि मे वृष:।
रमेऽहं सह गोभिश्च तस्मात् पूज्या: सदैव ता:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
इसीलिए मेरी गौओं के समूह में रहने वाला बैल मेरे रथ की ध्वजा में मेरे ऊपर विराजमान रहता है। मैं सदैव गौओं के साथ रहकर प्रसन्न रहता हूँ। इसलिए उन गौओं की सदैव पूजा करनी चाहिए। 7.
 
That is why the bull that lives in my herd of cows is present above me in the flag of my chariot. I always feel happy in the company of the cows. Therefore, those cows should always be worshipped. 7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)